
ठीक 7:00 बजे सुबह—
घर में हल्की-हल्की भागदौड़ शुरू हो चुकी थी। नीचे सब लोग तैयारियों में लगे थे — सूटकेस बंद हो रहे थे, टिकट चेक हो रहे थे, दादी बार-बार सबको जल्दी करने के लिए बोल रही थीं।


ठीक 7:00 बजे सुबह—
घर में हल्की-हल्की भागदौड़ शुरू हो चुकी थी। नीचे सब लोग तैयारियों में लगे थे — सूटकेस बंद हो रहे थे, टिकट चेक हो रहे थे, दादी बार-बार सबको जल्दी करने के लिए बोल रही थीं।

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