
करीब एक घंटा बाद
ऊपर — रूही का कमरा


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मासूम इश्क़ कहते हैं, मासूमियत सबसे ख़तरनाक होती है… क्योंकि वह बिना इरादा सब कुछ बदल देती है। 18 साल की लविष्का मलिक—मासूम, थोड़ी ज़िद्दी, अपने सपनों के साथ मुंबई आती है। 30 साल का वीरांश राठौर—माफ़िया किंग और कामयाब बिज़नेसमैन, जिसने भरोसा करना छोड़ दिया था। पहली मुलाक़ात में लवी का एक थप्पड़ सब कुछ बदल देता है। यह कहानी मोहब्बत से नहीं, एक ग़लती और खतरनाक खेल से शुरू होती है। — Masoom Ishq



कभी-कभी इश्क़ सिर्फ़ मोहब्बत नहीं होता… वो एक ऐसा गुनाह बन जाता है। वो था माफ़िया की दुनिया का बेताज बादशाह—24साल काविक्रांत खन्ना। बेरहम, ख़तरनाक… जिसकी दुनिया में प्यार से ज़्यादा नफ़रत थी। और वो थी चाँद कपूर — जो अपनी बेटी के साथ सिर्फ़ सुकून की ज़िंदगी चाहती थी। पर किस्मत ने उसे बाँध दिया एक ऐसे शख़्स से, जिससे नज़रें मिलाना भी ख़तरा था। ये कहानी सिर्फ़ प्यार की नहीं… ये गुनाह, वफ़ादारी और जंग की कहानी है। इस इश्क़ में एक ही रास्ता है— या तो जियो… या मिट जाओ।



19 साल की सान्वी को उसके ही दोस्त ने धोखे से बेचा। वहाँ उसका नाम नहीं, सिर्फ कीमत थी। हर रात उसकी दुनिया एक नई सज़ा बन चुकी थी। उसी अँधेरे में 28 साल का आर्यमान राणा आया। उसने सान्वी को खरीद लिया और वहाँ से ले गया, लेकिन हर दिन उसे यही एहसास दिलाता रहा — वह “खरीदी हुई” है। सान्वी की नफ़रत उसकी हर बात पर बढ़ती रही। फिर एक दिन सच सामने आया — सान्वी वहाँ सिर्फ दोस्त की गद्दारी की वजह से नहीं पहुँची थी, बल्कि आर्यमान के पुराने बदले का हिस्सा थी। अब सवाल यह है — क्या सान्वी सिर्फ बदले की कीमत थी, या दोनों पहले से ही एक ही दर्द की धुन में बंधे थे? और क्या ये नफ़रत कभी मोहब्बत में बदल सकती है… या दर्द हमेशा उन्हें अलग ही रखेगा?




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