
लवी का कमरा। रात के 3:15 बज रहे थे।
लवी ने सारे दरवाज़े चेक कर लिए थे। सब बंद थे। पर उसका दिल नहीं मान रहा था। वो बिस्तर के किनारे बैठी थी, फोन उसके हाथ में था—स्विच ऑफ। पर वो जानती थी, इससे कुछ नहीं होगा।


लवी का कमरा। रात के 3:15 बज रहे थे।
लवी ने सारे दरवाज़े चेक कर लिए थे। सब बंद थे। पर उसका दिल नहीं मान रहा था। वो बिस्तर के किनारे बैठी थी, फोन उसके हाथ में था—स्विच ऑफ। पर वो जानती थी, इससे कुछ नहीं होगा।

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