
लवी तेज़ कदमों से घर पहुँची। दरवाजा खोलते ही उसने सीधे अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया। वह दीवार के सहारे खड़ी हो गई और गहरी-गहरी साँसें लेने लगी। "शांत हो... बस शांत हो जा," उसने खुद से फुसफुसाया। कुछ मिनट बाद, जब उसकी धड़कन थोड़ी सामान्य हुई, तो उसने चेहरे पर पानी के छींटे मारे और खुद को सँभाला।
वह डाइनिंग टेबल के पास पहुँची तो आरोही किचन में डिनर तैयार कर रही थी। कुछ ही देर में आरोही ने खाना टेबल पर लगा दिया और अनुज को आवाज़ दी, जो अभी-अभी घर आया था।




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