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आह्ह वीरांश

मुंबई की हल्की-हल्की हवा और ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी ने शहर को एक अलग ही vibe दे रखी थी।

Lavi, यानी लविष्का मलिक, अपनी छोटी सफ़ेद सूटकेस को कसते हुए चल रही थी। 18 साल की ये लड़की थोड़ी मासूम थी, थोड़ी ज़िद्दी, और हर कदम में उसकी excitement साफ़ झलक रही थी। आज उसका पहला दिन था—मुंबई, उसके सपनों का शहर।

“बस थोड़ा और… मनन अंकल के घर पहुँचते ही सब ठीक लगेगा,” उसने मन ही मन कहा। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन चेहरे पर हल्की मुस्कान भी थी।

जैसे ही वह दरवाज़े के पास पहुँची, पीछे से मीठी हँसी सुनाई दी।

“Lavi… मेरी छोटी बच्ची!”

Lavi की आँखों में तुरंत चमक आ गई। दरवाज़ा खुला और सामने खड़ी थी Aarohi—वो बड़ी, प्यारी और हमेशा उसकी protect करने वाली दोस्त, जैसे बहन।

“दीदी!” Lavi दौड़ती हुई उसके पास पहुँची और गले लग गई।

Aarohi ने उसे कसकर पकड़ा। “आयी मेरी छोटी गुड़िया… मुंबई का पहला कदम हमेशा याद रहेगा।”

Lavi थोड़ी nervous सी मुस्कान के साथ बोली, “दीदी… मैं थोड़ी nervous हूँ… सब कुछ बड़ा और नया है यहाँ।”

Aarohi ने उसके सिर पर प्यार से हाथ रखा। “Nervous? नहीं बच्चा, मैं हूँ न। सब ठीक रहेगा। बस अपनी वही मुस्कान रखती रहो।”

Lavi ने हल्के से सिर झुकाया। “दीदी… मैं सब कुछ आपसे शेयर करूँगी… जैसे हम हमेशा करती हैं।”

Aarohi ने उसे फिर से गले लगाया और softly बोली, “बस यही सुनना चाहती थी मैं… तुम हमेशा मेरी छोटी दोस्त रहोगी। और मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।”

उनकी हँसी और गर्माहट ने शाम की ठंडी हवा को भी हल्का सा soften कर दिया। Lavi ने महसूस किया कि चाहे शहर कितना भी बड़ा और नया क्यों न हो, Aarohi के साथ उसकी दुनिया safe है।

“चलो, अब तुम्हारा कमरा ready है। थोड़ी देर आराम कर लो, फिर मैं तुम्हें शहर दिखाऊँगी,” Aarohi ने कहा।

“दीदी… मुंबई का पहला दिन और आपके साथ… perfect लग रहा है,” Lavi ने आँखें चमकाते हुए कहा।

Aarohi ने मुस्कुराते हुए कंधों पर हाथ रखा। “और हमारी perfect कहानियाँ यहीं से शुरू होती हैं, बच्चा। Ready हो?”

“Ready हूँ, दीदी!”

और ऐसे Lavi का पहला दिन मुंबई में, excitement और प्यार दोनों से भरा हुआ, शुरू हुआ।

लवी और आरोही अभी भी गले मिलने की गर्माहट में खोई हुई थीं कि पीछे से किसी की आवाज़ आई—

“अरे, उसे अंदर तो आने दो!”

दोनों ने पीछे मुड़कर देखा। वहाँ कोई और नहीं थी—बल्कि आरोही की दादी, जिसकी आँखों में प्यार और थोड़ी मस्ती दोनों झलक रही थी।

Lavi ने झिझकते हुए कदम बढ़ाया और झुककर दादी के पैर छू लिए।

“दादी…” लवी की आवाज़ में सच्ची आदर और एक्ससिटेमेंट थी।

दादी ने मुस्कुराते हुए लवी को कसकर गले लगाया।

“आओ बैठो बच्चा। तुम इसे नहीं जानती, पर ये पूरा टाइम बातों में ही लगेगी। पहले तो फोन पर बातें होती थीं, अब आमने-सामने… न जाने कितनी बातें करोगे तुम दोनों।”

Lavi हँसते हुए दादी के पास बैठ गई।

“दादी… मैं थोड़ी नर्वस थी, पर अब…” उसने आरोही की तरफ़ देखते हुए कहा, “अब बहुत अच्छा लग रहा है।”

इसी बीच पीछे से एक हल्की, थोड़ी टीसिंग आवाज़ आई।

“दादी पूछो मत… अब तो पूरे टाइम लाउडस्पीकर ऑन रहेगा।”

Lavi और आरोही दोनों एक ही पल चौंककर पीछे मुड़े। वहाँ खड़ा था अनुज —एक हैंडसम लड़का, जिसकी उम्र 24 साल थी। दिखने में calm और कॉंफिडेंट, पर पर्सनालिटी में थोड़ी प्लेफुल एनर्जी।

आरोही ने अपने कमर पर हाथ रखकर टीसिंग अंदाज़ में कहा,

“तुम कुछ ज्यादा नहीं बोल रहे हो, अनुज।”

अनुज ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कान पकड़ा और बोला,

“ऑफ्फ़ दीदी… मैं थोड़ा सा ही तो बोला!”

Aarohi ने आंखें मारते हुए कहा,

“अरे हाँ, थोड़ा सा… हमेशा थोड़ा सा ही बोलता है, है न?”

Lavi ने बीच में interrupt करते हुए मुस्कुराते हुए पूछा,

“दीदी… ये अनुज भाई है?”

आरोही ने हँसते हुए सिर हिलाया।

“हाँ, Anuj… दो साल छोटा मुझसे, पर तुमसे बड़ा। थोड़ी मस्ती और थोड़ी ऐटिटूड वाली पर्सनालिटी है। लड़कियों जैसे मिजाज है जनाब के”

Anuj ने हल्का सा सिर झुकाया और मुस्कुराते हुए कहा,

“ हेलो लवी … फाइनली face-to-face। पूरे टाइम दिवस तुम्हारी ही बातें करती हैं,

सभी आरोही बोली “ क्यों ना बोलो है ही मेरी बहन इतनी प्यारी तुम्हारी तरह नहीं पूरे टाइम मुझसे लड़ाई करता फिरे “

Lavi ने शर्माते हुए हँसी दी।

“hii भाई … मैं रेडी हूँ… लेकिन उम्मीद है, आप ज्यादा टीसिंग नहीं करेंगे।”

अनुज ने प्लेफुल अंदाज़ में कंधा उठाया।

“टीसिंग? ऑफ कोर्स, बच्ची… थोड़ा बैलेंस रखूँगा… मोस्टली।”

दादी ने दोनों की तरफ़ देख कर हँसते हुए कहा,

“आते ही तुम इस डरा दो”

लवी ने आरोही की तरफ़ देखते हुए हल्की मुस्कान दी।

“दी… लगता है अब ये जगह और इंटरेस्टिंग होने वाली है।”

आरोही ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।

“बस बच्चा… वेलकम टू द रियल मुंबई लाइफ!”

लवी इधर-उधर देखते हुए थोड़ी confused सी बोली,

“दीदी… अंकल और आंटी यहाँ नहीं हैं क्या?”

दादी ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।

“अरे बच्चा, किसी काम से बाहर गए हैं। शाम तक आ जाएंगे। तब तक तुम जाओ, अपने कमरे में आराम कर लो। और हाँ, भूख भी तो लगी होगी तुम्हें।”

लवी ने हल्की मुस्कान दी और सिर हिलाया।

“ठीक है, दादी…”

आरोही ने उसका हाथ पकड़कर कहा,

“चलो, मैं तुम्हें तुम्हारे कमरे तक ले जाती हूँ। थोड़ी देर आराम कर लो, फिर बाहर शहर घुमाने चलेंगे।”

लवी ने उत्साहित होते हुए कहा,

“दीदी… बिल्कुल! लेकिन पहले कमरा तो देखना है।”

आरोही ने हँसते हुए कहा,

“हाँ, हाँ… जल्दी ही। चलो।”

दोनों सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ीं। कमरे तक पहुँचते-पहुँचते लवी इधर-उधर देखने लगी। हर चीज़ उसके लिए नई और interesting थी—फर्नीचर, दीवारों के रंग, छोटे-छोटे décor आइटम।

“दीदी… ये कमरा कितना सुंदर है!” लवी ने खुशी से कहा।

आरोही ने उसकी तरफ़ मुस्कुराते हुए देखा।

“तुम्हारे लिए खास रखा है, बच्चा। अब अपना सूटकेस रखो, थोड़ा आराम करो। भूख लगने के बाद शाम तक के लिए energy भी चाहिए तुम्हें।”

लवी ने तुरंत अपनी सूटकेस कमरे में रख दी।

“दीदी… अब थोड़ी देर बैठूँगी और फिर…”

“हाँ, फिर हम शहर की सैर के लिए निकलेंगे। पर पहले थोड़ा fresh हो जाओ,” आरोही ने कहा और मुस्कुराई।

फिर आरोही ने लवी का हाथ पकड़कर ऊपर कमरे तक ले गई। लवी ने अंदर कदम रखते ही देखा कि कमरा साफ़-सुथरा और आरामदायक था। खिड़की से हल्की रोशनी अंदर आ रही थी और शहर की हल्की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं।

“दीदी… सच में, यहाँ सब कुछ इतना अलग और अच्छा लगता है… जैसे सपना हो,” लवी ने उत्साहित होते हुए कहा।

आरोही ने हँसते हुए सिर हिलाया।

“बस बच्चा… ये तो सिर्फ शुरुआत है। अब थोड़ी देर आराम करो, फिर पूरा शहर तुम्हारा इंतजार कर रहा है।”

लवी ने कमरे की तरफ़ देखा और मुस्कुराई। उसके दिल में excitement और खुशी दोनों ही उमड़ रही थी।

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दूसरी तरफ,

मुंबई सिटी के एक सुनसान एरिया में जहां एक घर के नीचे एक बेसमेंट होता है,

बेसमेंट में अंधेरा घना था। दीवारों से टकराती चीख़ें और दर्द की आवाज़ें हर ओर गूंज रही थीं। विरांश राठौर

हाइट: 6’2” – हर स्टेप में दबदबा और आत्मविश्वास।

बॉडी: डार्क गेहूँ टोन, मसल्स परफेक्टली डिफ़ाइंड, जैसे हर मसल उसके खतरनाक व्यक्तित्व का आइना हो। शरीर देखकर कोई भी उसकी ताक़त और पावर को महसूस कर सकता है।

चेहरा: तीखी जॉ लाइन, ठोड़ी पर हल्का सा शैडो। आँखें काले गहरे, ठंडी और penetrating – एक नज़र बस, और कोई भी झुक जाए।

होठ: बॉडी के डार्क टोन से भी गहरे – almost डीप वाइन या डार्क बेर, जो हर मुस्कान में क्रूरता और आकर्षण दोनों दिखाए।

बाल: मैट ब्लैक, छोटे और perfectly styled, उसके डार्क लुक को और बढ़ाते हुए।

क्लोदिंग: डार्क टेलर-मेड सूट्स – काला, डार्क ग्रे या मिडनाइट ब्लू। कपड़े बॉडी की ताक़त और उसकी presence को हाईलाइट करें।

वो सोफे पर बैठे थे, एक पैर दूसरे पर क्रॉस किया हुआ, हाथ में सिगार और आँखों में वही ठंडी, खतरनाक चमक जो बताती थी कि यह आदमी सिर्फ़ सजा देने के लिए ही नहीं, बल्कि डर पैदा करने के लिए पैदा हुआ है।

उनके सामने एक आदमी उल्टा लटका हुआ था। उसके हाथ पैरों को बाँध रखा था, और हर चोट पर वह तड़पता, चीख़ता। राठौर का सेक्रेटरी उसके पास खड़ा था, हाथ में बेल्ट। वीरांश राठौर ने सिगार का कश लिया और धीमे, खतरनाक स्वर में कहा,

“तुमने धोखा दिया… और माफ़ी यहाँ कभी काम नहीं आती… जो एक बार गलती करता है, उसकी कीमत हमेशा उसके पीछे रहती है।”

उसका सेक्रेटरी राघव ने बेल्ट उठाया और उस के शरीर पर पहला वार किया। वो आदमी तड़पकर चीखा, “अहह …… प्लीज़… म… मिस्टर राठौर… माफ कर दो… मैं… मैं दोबारा गलती नहीं करूँगा…”

लेकिन राठौर ने मुस्कान नहीं दी, सिर्फ़ सिगार में धुआँ घुसाया।

राघव ने बेरहम अंदाज में जख्मों पर नमक रगड़ दिया। उस आदमी की चीख़ और भी ज़्यादा तेज़ हो गई। उसका शरीर झटकों से भर गया, साँसें टूट-टूट कर निकल रही थीं।

वीरांश ने धीरे-धीरे सोफे से उठकर हर कदम भारी फ़र्श पर पड़ते हुए उस आदमी के पास गए। उसने उसकी ठुड्डी उठाई और जबरन चेहरा ऊपर करवाया। उनकी आँखों में अंधेरा था, और आवाज़ में वही कड़कपन:

“यह माफ़िया की दुनिया है, अलोक … यहाँ गुनाह की कीमत वही होती है जो मैं तय करता हूँ।”

उसे आदमी के, आँखों में आँसू और डर साफ दिख रहा था वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला, “नहीं… प्लीज़… म… मैं अब कभी गलती नहीं करूँगा…”

वीरांश ने सिगार का दूसरा कश लिया और धीरे से कहा, “तुम्हारी गलती की कीमत… तुम्हें भुगतनी ही पड़ेगी।”

वो उस आदमी केऔर पास गया और झुककर उसके जख्मो पर अपने हाथ से नमक रगड़ने लगा। आदमी की चीख़ें और भी तेज़ हो गईं, उसकी सारी ताक़त गायब होती जा रही थी।

“अह… प्लीज़… मिस्टर राठौर… मैं… मैं दोबारा गलती नहीं करूँगा…” आदमी की आवाज़ हिचकिचाती और टूटती हुई थी।

वीरांश ने सिर झुका कर उसके कान के पास धीमे से कहा, “तुम जितना चिल्लाओगे, उतना मैं मुस्कुराता रहूँगा… याद रखो, दर्द ही असली मज़ा है।”

राघव और विरांश के साथ दो और आदमी खड़े थे, लेकिन वीरांश का ध्यान किसी और चीज़ में था। उसने अचानक अपने हाथों को तेज़ी से उठाया, और आदमी के सिर के ऊपर गोली चलाई। आवाज इतनी तेज़ थी कि कमरे के अंधेरे में जैसे समय थम गया। आदमी का शरीर झटके सेहिलने लगा , पर उसे आदमी की आवाज बिल्कुल शांत हो चुकी थी। और वीरांश के चेहरे पर वही कड़क, heartless मुस्कान थी।

“राघव,” वीरांश ने कमांड किया, आवाज़ इतनी ठंडी कि कमरे की दीवारों में भी गूँजने लगी, “यह सब साफ़ कर दो। वैसे भी तुम्हें पता है मुझे खून कितना पसंद है कहीं मुझे इससे प्यार ना हो जाए।

उसके साथ जो दो और आदमी थे, बिना कुछ कहे, वीरांश के साथ चले गए। उनके कदम कमरे के सन्नाटे में गूँज रहे थे।

लेकिन पीछे, एक आदमी—जो इस पूरी events को देख रहा था— एक आदमी जाते-जाते धीरे से मुड़ा। उसकी आँखें कसकर बंद हो गईं, उसके होंठ कांप रहे थे। वह जानता था कि उसने जो कुछ देखा, वह कभी वापस नहीं आएगा… और जो भी उस बेसमेंट में हुआ, उसका असर हमेशा उसके मन में रहेगा।

वीरांश ने कमरे की ओर आखिरी नज़र डाली। उसकी मुस्कान अब भी वही डरावनी, calculating चमक लिए हुए थी। जैसे उसने सिर्फ़ एक lesson नहीं दिया, बल्कि यह भी बता दिया कि यहाँ हर कदम उसके नियमों के अधीन है।

( kal ka chapter hot or romantic Hoga for followers ke liye )

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