
एक हफ्ता बीत गया।
हर दिन एक जैसा था। सुबह उठती। खिड़की के पास बैठती। बाहर देखती। शाम होती। दरवाज़ा खुलता। कोई आता। चला जाता। रात होती। फिर सुबह।


एक हफ्ता बीत गया।
हर दिन एक जैसा था। सुबह उठती। खिड़की के पास बैठती। बाहर देखती। शाम होती। दरवाज़ा खुलता। कोई आता। चला जाता। रात होती। फिर सुबह।

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